व्यथा के भार से थका नागरिक (रघुवीर सहाय पर मनमोहन) अंतिम किस्त
पिछली दो किस्तों से जारी) : रघुवीर सहाय के काव्य संसार में यह चीज बड़ी आश्वस्त करने वाली रही है कि यहाँ हम अपनी उन अनेक बनी-अधबनी चीजों को देखते हैं जिन पर अभी काम चल रहा है और जिनकी जगहें या शक्लें अंतिम रूप से तय नहीं हो गयी हैं। कई महाकवियों के यहा...
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Ek ziddi dhun
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[15 Dec 2009 09:02 AM]



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