आँखों का सागर.

स्पंदन     ( SPANDAN) सागर भरा है तुम्हारी आँखों में जो उफन आता है रह रह कर और बह जाता है भिगो कर कोरों को रह जाती है एक सूखी सी लकीर आँखों और लबों के बीच जो कर जाती है सब अनकहा बयाँ तुम रोक लिया करो उन उफनती , नमकीन लहरों को, न दिया करो बहने उन्हें कपोलों पे क्योंकि देख... [पूरी पोस्ट]
writer shikha varshney
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[15 Dec 2009 08:33 AM]

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