प्रश्नकाल के मुकाबिल विकास दर
बस जरूरत जरा-सा दिमाग लगाने की है, चीजें खुद-ब-खुद साफ हो जाती हैं। दरअसल, दिमाग का इस्तेमाल जहां हमें करना चाहिए वहां करते नहीं, बेमतलब की बातों में हर समय उलझे रहते हैं। बात बस इतनी-सी है कि प्रश्नकाल के दौर हमारे सांसद संसद में मौजूद नहीं रहते हैं...
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अंशुमाली रस्तोगी
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[15 Dec 2009 04:11 AM]



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