रात, चलते हैं अकेले ही सितारे
रात, चलते हैं अकेले ही सितारे। एक निर्जन रिक्त नाले के पास मैंने एक स्थल को खोद मिट्टी के हरे ढेले निकाले दूर खोदा और खोदा और दोनों हाथ चलते जा रहे थे शक्ति से भरपूर। सुनाई दे रहे थे स्वर – बड़े अपस्वर घृणित रात्रिचरों के क्रूर। काले-से सुरों में बोल...
[पूरी पोस्ट]
रंगनाथ सिंह
26
1
0
1
2
[15 Dec 2009 03:43 AM]



Shuffle








