कवि सम्मेलन में आज अलबेला खत्री प्रस्तुत करता है सरस्वती कुमार 'दीपक' का अनुरागी मन

Kavi Sammelan यह मेरा अनुरागी मन रस माँगा करता कलियों से लय माँगा करता अलियों से संकेतों से बोल मांगता - दिशा मांगता है गलियों से जीवन का लेकर इकतारा फिरता बन बादल आवारा ___ सुख - दुःख के तारों को छूकर ___ गाता है बैरागी मन ___ यह मेरा अनुरागी मन कहाँ किसी से माँग... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[15 Dec 2009 00:35 AM]

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