सुबह हो रही है...
सुबह का समय है, ठंडी बयार चल रही है। पंछी चहचहा रहे है, रसीले गीत गा रहे है। सूरज निकल रहा है, किरणे फैला रहा है। चारो तरफ़ जैसे, इक जादू सा छा रहा है। मन्दिर में कहीं पुजारी, घंटी बजा रहा है। मस्जिद में कहीं मुल्ला, खुदा को बुला रहा है गुरद्वारे में...
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आशु
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[14 Dec 2009 23:27 PM]



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