Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi

Ismat Zaidi एक कविता वीरों के नाम ______________________________ आज संसद में बड़ी शान से जो बैठे हैं लेके चेहरों पे हंसी और चमक बैठे हैं आज वे भूल गए जबकि हुआ था हमला आज वे भूल गए कैसे बची जाँ उनकी आज वे भूल गए घुस गए होते उस दिन लेके हथियारों का अंबार अगर आतंकी... [पूरी पोस्ट]
writer इस्मत ज़ैदी
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[14 Dec 2009 22:59 PM]

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