लडकियां बनाम समाज

प्रतीक माहेश्वरी बस खचाखच भरी थी और लोग जैसे तैसे अपने से ज्यादा अपने जेबों को संभाल रहे थे.. तभी निशा बस में चढ़ी क्योंकि उसे दूसरे बस के जल्दी आने की उम्मीद नहीं थी.. एक नवयुवक ने नवयुवती को देखा तो झट खड़ा होने को आया.. और कहा - "आप बैठिये, मैं खड़ा हो जाता हूँ |" नि... [पूरी पोस्ट]
writer Pratik Maheshwari

मैं और जिंदगी...

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[14 Dec 2009 22:53 PM]

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