स्मृति गीत: और होना चाहिए... --संजीव 'सलिल'
स्मृति गीत संजीव 'सलिल' एक कोना कहीं घर में, और होना चाहिए... * याद जब आये तुम्हारी, सुरभि-गंधित सुमन-क्यारी. बने मुझको हौसला दे, क्षुब्ध मन को घोंसला दे. निराशा में नवाशा की, फसल बोना चाहिए. एक कोना कहीं घर में, और होना चाहिए... * हार का अवसाद हरकर,...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
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[14 Dec 2009 14:04 PM]



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