गोपन कथा
हमारी जिंदगी ऐसी गोपन कथा सी है हमें सब मालूम फिर भी खोजते रहते हैं हम संकेतों को उस जिंदगी को जीते हुए उसे पहेली मान लगे रहते हैं बूझते पेड़ों से अदृश्य जंगलों में लुढ़कती हुई नींद की ढलानों पर संभालते अपने आपको बटोरते अपनी नग्नता को पतझर के बियाबान...
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मोहन राणा - Mohan Rana
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[14 Dec 2009 13:59 PM]



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