नांगट जमाय
श्रीमती कामिनी कामायनी हकासल पियासल लाल काकी दौडल अयलहि। भट-भट आँखि सँ नोर खसैत, "यै बहिन... कनि चलथुन्ह है... ओझा मौहक नहि करैत छथिन्ह", नूआक खूट सँ आँखि पोछैत बजलीह। त' बहिन आने की पुरैनिया वाली काकी तुरते पएर मे चप्पल पहिर संग धेलिह। काजक आंगन......
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सम्पादक: कतेक रास बात
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[14 Dec 2009 13:56 PM]



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