मजाक बन गई मप्र सरकार की राजेन्द्र माथुर फैलोशिप
प्रारंभिक दौर में गरिमा के साथ सुयोग्य पत्रकारों को दी गई यह फैलोशिप ताजा दौर में रेवडी की भांति चीन्ह-चीन्ह कर दी जा रही है। दुख तो यह है कि फैलोशिप देने वाले और पाने वाले के अलावा शायद ही कोई जान पाता हो कि मूर्धन्य पत्रकार स्वर्गीय श्री माथुर के न...
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भीमसिंह मीणा
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[14 Dec 2009 10:33 AM]



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