एक उदासी इन्ही उनीदीं .पलकों के कर नाम .......
अस्वस्था के कारण लेखन कार्य से दूर रहा,आज अपनी एक पुरानी रचना पुन: प्रकाशित कर रहा हूँ ,शायद पसंद आये। एक उदासी इन्ही उनीदीं .पलकों के कर नाम मैनें आज बिता डाली फिर,जीवन की इक शाम रजनी का तम रवि को तकता हौले- हौले दर्द सिमटता एक करूण शाश्वत जल-धरा,है...
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vikram7
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[14 Dec 2009 09:52 AM]



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