किनारा

गुलमोहर का फूल किनारे को लांघकर लकीर पर चढ़ता गया मैं । लकीर बढ़ती हीं गयी और रह गया मैं किनारे पर हीं । आखिर यह किनारा खत्म क्यों नहीं होता ?... [पूरी पोस्ट]
writer चंदन कुमार झा
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[14 Dec 2009 09:08 AM]

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