शाम के चार बजे , दिल के तार बजे
शाम के चार बजे , दिल के तार बजे ... हर ध्वनि लगे शहनाई मन मधुवन में मचले अमराई नवंकृत हो मचले तरुणाई रहस्यमयी मुस्कान अधरों पर सजे... शाम के चार बजे , दिल के तार बजे ... रुनझुन-रुनझुन करती धड़कन , सांसों में है अपनापन , दिल दिमाग में चलती अनबन, प्राण...
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शोभित जैन
nazm
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[14 Dec 2009 06:49 AM]



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