क्योंकि मैं आज थोड़ा सुरूर में हूँ ..........
महक ये उसी के मन की है जो चली आ रही है केश खोले दहक ये उसी बदन की है जो दहका रही है हौले हौले महल मोहब्बत का आज सजा संवरा है आग भड़कने का आज बहुत खतरा है डर है कहीं आज खुल न जाए राज़ क्योंकि मैं आज थोड़ा सुरूर में हूँ उसी की मोहब्बत के गुरूर में हूँ ज...
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[14 Dec 2009 06:00 AM]



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