दो व्यंग्य कविताएं

virendra jain ke nashtar दो व्यंग्य कवितायें वीरेन्द्र जैन 1. जी हाँ मैं भोपाल से ही बोल रहा हूँ जी हाँ मैं पूरे होशो हवाश में कह रहा हूं कि नहीं रिसी कोई गैस इन दिनों पर पता नहीं ये सारे लोग एक ही दिशा में क्यों भाग रहे हैं हो सकता है कि वहाँ साहित्य संस्कृति के पुरस्कारों... [पूरी पोस्ट]
writer वीरेन्द्र जैन

व्यंग्य कविताएं

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[14 Dec 2009 02:46 AM]

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