तेहिं तर ठाढ़ि हिरनियाँ ....
अम्मा गा रही हैं - "छापक पेड़ छिउलिया कि पतवन गहवर हो..." । मन टहल रहा है अम्मा की स्वर-छाँह में । अनेकों बार अम्मा को गाते सुना है, कई बार अटका हूँ, भटका हूँ स्वर-वीथियों में । कितनों को संगी बना लिया है अम्मा के गीतों से उठाकर, कितनों के गले मिल रोय...
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हिमांशु । Himanshu
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[14 Dec 2009 00:40 AM]



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