आज कवि सम्मेलन की महफ़िल सजी है 'नीरज' जी से
एक दिन भी जी मगर तू ताज बन कर जी अटल विश्वास बन कर जी अमर युग गान बन कर जी आज तक तू समय के पदचिन्ह सा ख़ुद को मिटा कर कर रहा निर्माण जग - हित एक सुखमय स्वर्ग सुन्दर स्वार्थी दुनिया मगर बदला तुझे यह दे रही है - भूलता यह - गीत तुझको ही सदा तुझसे निकल क...
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[14 Dec 2009 00:25 AM]



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