नाचिये, थाप जब उठे दिल से

नीरज चाह तुझ को नहीं है पाने की खासियत ये तेरे दिवाने की गैर का साथ गैर के किस्से ये तो हद हो गई सताने की साथ फूलों के वो रहा जिसने ठान ली खार से निभाने की टूट बिखरेगा दिल का हर रिश्‍ता छोडि़ये जिद ये आजमाने की सारी खुशियों को लील जाती है होड़ सबसे अधिक क... [पूरी पोस्ट]
writer नीरज गोस्वामी
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[13 Dec 2009 23:50 PM]

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