उलझन
वो आए है ,खुशियों की सौगात लेकर , मेरी भीगी पलकों में ,सपने सजाने। न जाने कहा क्या है ,नजरों ने दिल से, हुए ग़ुम है शिकवे,भूले सब फ़साने। करू भी मै कैसे , यकीं इस वफ़ा पर, जो बोलूं तो लगते है,लब थरथराने। है आहट से उनकी ,ये महकी फिजाये, है मदहोश आलम,है...
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radhasaxena
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[13 Dec 2009 23:22 PM]



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