ghazal
ग़ज़ल -___________________________ दिल में बुग्ज़ छिपा रक्खा है मुंह पर नामे खुदा रक्खा है कोई ना समझा उस ने दिल में कितना दर्द छिपा रक्खा है मद्दे मुक़ाबिल इस आंधी के रौशन एक दिया रक्खा है भाईचारा ख...
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इस्मत ज़ैदी
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[13 Dec 2009 22:49 PM]



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