वक्त नहीं मेरे पास

मनोरमा सभी आधुनिक सुख पाने को हरदम करे प्रयास। इस कारण से रिश्ते खोये आपस का विश्वास। भैया जी ऽऽऽऽऽऽऽ क्योंकि वक्त नहीं मेरे पास।। उनसे बात नहीं होती थी जो बसते परदेश में। क्या मिठास अपनापन भी था चिट्ठी के संदेश में? अब तो बातें हर पल सम्भव, क्या वैसा एहसास... [पूरी पोस्ट]
writer श्यामल सुमन
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[13 Dec 2009 21:59 PM]

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