सुनो तो मेरी भी
हे मर्द, तुमने क्या कहा? ज़रा दुहराना तो तुमने कहा- हम औरतें, कोमल हैं, कमज़ोर हैं! लाचार हैं साथ तुम्हारे चलने को, हमारा कोई अस्तित्व नहीं है बगैर तुम्हारे! तुम्हारी इन बातों पर, बचकानी सोच पर, जी करता है खूब हँसू…….! सोचती हूँ, कैसे बोलते हो तुम ये स...
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विकास
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[13 Dec 2009 13:14 PM]



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