प्राण-संचार
तुम्हारे चेहरे की धूप तुम्हारी आँखों की नमी तुम्हारी पुकार की शीतलता मुझमें प्राण- संचार करते गए ........ दुःख के घने बादलों का अँधेरा मूसलाधार बारिश सारे रंग बदरंग थे ! पर तुमने अपनी मुठ्ठी में मेरे लिए सारे रंग समेट रखे थे मैं रंगविहीन हुई ही नहीं...
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रश्मि प्रभा...
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[13 Dec 2009 09:52 AM]



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