ताज्जुब है!

chhammakchhallo kahis मैने बाल कटाए और अपने बदले रूप पर मुग्ध हुई. मैने बगैर किसी की सलाह के चश्मा खरीदा मुझे अच्छा लगा, अपने जन्म दिन पर मिठाइयां बांटीं, बधाइयां बटोरीं मैं तनिक इतराई- जन्मदिन पर कल तुमसे लडाई की, बेचैन रही रात भर, सोई नहीं सुबह दस मिनट में पकनेवाली सब्ज... [पूरी पोस्ट]
writer Vibha Rani
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[13 Dec 2009 08:10 AM]

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