इन दिनों
एक जंगल सा उग आया है मेरे भीतर इन दिनों वहाँ रास्ते नहीं पगडंडियाँ नहीं कोई जाने पहचाने निशान नहीं कोई जल्दी नहीं बेखबर है यह दुनिया समय की हलचलों से चाँद उग आया है यहाँ उल्टा होकर !...
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[05 Dec 2009 04:02 AM]



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