दरारें

रचना रवीन्द्र दरारें पहले रिश्तों में कुछ दरारें रहती थीं अब दरारों में रिश्ते रहते हैं पहले दरारों को हम सीते थे आज उन्हीं दरारों में हम जीते हैं कभी ये रिश्ते धरोहर की तरह संजोये जाते थे आज सिर्फ दिखाने को ढोए जाते हैं कभी ये रिश्ते चाशनी से मीठे आज के रिश्ते ख़... [पूरी पोस्ट]
writer रचना दीक्षित
views
19
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
12
[13 Dec 2009 07:08 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix