छोड़िए छोड़िए सारे शिकवे गिले.
ग़ज़ल अपनी नज़रों से यूँ ना गिरा दीजिए. दूसरी जी में आये सज़ा दीजिए. छोड़िए छोड़िए सारे शिकवे-गिले, हो सके तो ज़रा मुस्करा दीजिए. पास हैं आज तो आप उखड़े हुए, दूर जायें तो फिर ना सदा दीजिए. थम न जायें कहीं आशिकी में कदम, थोड़ा थोड़ा सही हौसला दीजिए. म...
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डॉ.सुभाष भदौरिया.
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[13 Dec 2009 05:50 AM]



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