अवधी उपन्यास - क़ासिद (9)
अरे तो एहिते का भा। छोटे बड़े क बात एहिमा कहां ते आगै। बात कौनौ नई चीज़ सीखै कि होए तो छोटेहो बड़ने का सिखा सकति हैं। “ टिल्लू अबकी दांय पूरे भरोसे के साथ बोले। उई जा तो रहे रहैं ख्यालन लेकिन आयशा तेरे मुचौटा करेम उनका मज़ा आवन लाग है। आयशा क तनिकौ उ...
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पंकज शुक्ल
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[13 Dec 2009 04:12 AM]



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