व्यंग्य को आलोचना की बैसाखी की जरूरत नहीं- के.पी. सक्सेना

हिन्दी खबरें हिन्दी व्यंग्य एवं आलोचना पर राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न लखनऊ, 30 नवम्बर। हिन्दी व्यंग्य साहित्यिक आलोचना की परिधि से बाहर है? इस विषय पर आज उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान और माध्यम साहित्यिक संस्थान की ओर से अट्टहास समारोह के अन्तर्गत आयोजित दो दिवसीय विच... [पूरी पोस्ट]
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vyangya

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[13 Dec 2009 01:22 AM]

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