हिन्दू धर्म संदेश-पेट में पचे वही खाना खायें (pet men pache vahi khana khayen-hindu dharm sandesh)
भक्ष्योत्तमप्रतिच्छन्नं मत्स्यो वङिशमायसम्। लोभाभिपाती ग्रसते नानुबन्धमवेक्षते।। यच्छक्यं ग्रसितुं ग्रस्यं ग्रस्तं परिणमेच्च यत्। हितं च परिणामे यत् तदाद्यं भतिमिच्छता।। हिंदी में भावार्थ -मछली कांटे से लगे चारे को लोभ में पकड़ कर अपने अंदर ले जाती है...
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दीपक भारतदीप
आध्यात्म
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[13 Dec 2009 01:14 AM]



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