संत कबीर वाणी-निंदक तो नकटा होता है (nindak bura hota hai-sant kabir vani)
निन्दक ते कुत्ता भला, हट कर मांडे शर कुत्ते ते क्रोधी बुरा, गुरू दिलावै गार।। संत शिरोमणि कबीरदास जी का कहना है कि निन्दक से कुत्ता भला है जो दूर होकर भौंकता है। इतना ही नहीं कुत्ते से बुरा वह क्रोधी व्यक्ति है जो अपने गुरु को अपने आचरण के कारण गाली...
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दीपक भारतदीप
dharm
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[13 Dec 2009 00:37 AM]



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