कलिंग की युद्ध भूमि को देखकर
कई बरस पहले उड़ीसा गया था। उस वक्त धौलगिरि और कोणार्क देखकर कुछ कविताएं लिखी थीं। इतने साल गुजर गए हैं, लेकिन ये कविताएं मुझे आज भी अच्छी लगती हैं। अपने पाठक-मित्रों के लिए आज ये दो कविताएं प्रस्तुत कर रहा हूं। एक जहाँ लड़ा गया था युद्ध वहाँ खेत खड़...
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प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi
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[12 Dec 2009 23:40 PM]



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