मेरे पिता और पक्षी फीनिक्स
खुली खिड़की से कुलवंत हैप्पी कुछ दिन पहले मैं अहमदाबाद के रेलवे स्टेशन पर खड़ा बठिंडा को जाने वाली रेलगाड़ी का इंतजार कर रहा था, मैं खड़ा था, लेकिन मेरी नजर इधर उधर जा रही थी, लड़कियों को निहारने के लिए नहीं बल्कि कुछ ढूंढने के लिए, जो खोया भी नहीं था। इत...
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Kulwant Happy
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[12 Dec 2009 23:33 PM]



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