आज बांचिये महेश अनघ की अद्भुत रचना...........
कौन है ? सम्वेदना ! कह दो अभी घर में नहीं हूँ । कारखाने में बदन है और मन बाज़ार में साथ चलती ही नहीं अनुभूतियाँ व्यापार में __ क्यों जगाती चेतना __ मैं आज बिस्तर में नहीं हूँ । यह , जिसे व्यक्तित्व कहते हो महज सामान है फर्म है परिवार सारी ज़िन्दगी दूका...
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[12 Dec 2009 22:45 PM]



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