उम्मीद

Tarun's World न जाने कितनी बार गिरा था मैं मगर हर बार कभी पल दो पल मैं और कभी कुछ देर ठहरकर मैं उठ जाता था और चल निकलता था अपने रास्तो पे मगर उस दिन जब तुमने मेरा हाथ छोड़ा था मैं कुछ ऐसे गिरा था कि अब तक नहीं उठ पाया हूँ अब तक गिरा हुआ मैं बस एक हाथ मांगता हूँ एक... [पूरी पोस्ट]
writer tarun
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[12 Dec 2009 18:45 PM]

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