गंगा स्नान

दिल से हरिद्वार में हर कि पौडी पर बैठा था तो कुछ इस तरह के विचार मन में आये थे ! (१) गंगा में डुबकी लगाई पापों से मुक्ति पायी , फिर शुरू होंगे नए सिरे से अनवरत पाप! (२) हर कि पौडी हर लेती हर पाप और हम फिर से तरोताजा और पाप करने को !... [पूरी पोस्ट]
writer nilesh mathur
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[23 Oct 2009 04:24 AM]

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