सीने से चिपकाती है, हो कैसी भी संतान

Hamzabaan हमज़बान माँ जैसा सुंदर और महत्वपूर्ण शब्द आज तक न हुआ. किसी फिल्म का संवाद मेरे पास माँ है! सब कुछ कह जाता है.यूँ तो इस विषय पर बहुत कुछ लिखा गया है और लिखा जाता रहेगा.लेकिन कवि कुलवंत सिंह की ये छंदबद्ध रचना अपनी बनावट और शिल्प में ध्यान अवश्य खींचती है.उन्... [पूरी पोस्ट]
writer शहरोज़
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[12 Dec 2009 12:59 PM]

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