सत्य का बोलबाला झूठे का मुँह काला
अक्सर लोग कहते हुए मिल जाते है -अब तो झूठ और बेमानी के बिना गुजारा नही /जब की हमने छोटी उमर से सिखा है सत्य की ही अंत पन्त विजय होती है /और तमाम साहित्य जो चाहे धरम के रूप में हो या सामान्य साहित्य हो सभी जगह यही देखा की जित सत्य की ही होती है परन्तु...
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S B Tamare
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[18 May 2009 11:05 AM]



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