पुराना शे‘र नई बहर में--श्याम सखा

gazal k bahane दिल आज फ़िर फ़साद करने लगा है उस बेवफा को याद करने लगा है बेताब रूह थी कभी मिलने को ‘ श्याम ’ अब जिस्म भी जिहाद करने लगा है मुस्तफ़इलुन,मफ़ाइलुन,फ़ाइलातुन २ २ १ २ , १२ १ २ . २ १२ २ मेरा एक और ब्लॉग http://katha-kavita.blogspot.com/ my another blog http://... [पूरी पोस्ट]
writer श्याम सखा 'श्याम'
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[12 Dec 2009 03:19 AM]

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