पुराना शे‘र नई बहर में--श्याम सखा
दिल आज फ़िर फ़साद करने लगा है उस बेवफा को याद करने लगा है बेताब रूह थी कभी मिलने को ‘ श्याम ’ अब जिस्म भी जिहाद करने लगा है मुस्तफ़इलुन,मफ़ाइलुन,फ़ाइलातुन २ २ १ २ , १२ १ २ . २ १२ २ मेरा एक और ब्लॉग http://katha-kavita.blogspot.com/ my another blog
http://...
[पूरी पोस्ट]
श्याम सखा 'श्याम'
15
1
0
1
10
[12 Dec 2009 03:19 AM]



Shuffle








