मुझे यें पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगती हैं
दीपक राग है चाहत अपनी , कैसे सुनाएँ तुम्हें ? ख़ुद तो सुलगते ही रहते हैं , क्यूँ सुलगाएं तुम्हें ??...
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Akbar Khan +919416557786
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[12 Dec 2009 01:00 AM]



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