वो तजुर्बा भी बेकार हुआ

अभिव्यक्ति बाद तेरे न किसी का भी ऐतबार हुआ एक जो था वो तजुर्बा भी बेकार हुआ तुझे थे ही नहीं पसंद इंसान यहाँ के खुदाया दिल कुरबां क्यूँ कई बार हुआ तुम्हे देखने की तमन्ना हर रात रही और तुझे भूलना भी हर सुबह यार हुआ तुम मिले नहीं और रही कई ख्वाहिश दिल में ऐसे ही अ... [पूरी पोस्ट]
writer gargi gupta
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[11 Dec 2009 23:41 PM]

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