मुरली तेरा मुरलीधर 39
तरुण तिमिर देहाभिमान का तुमने रचा घना मधुकर सुख दुख की छीना झपटी में चैन हुआ सपना निर्झर धूल जमी युग से मन दर्पण पर हतभागी जाग मलिन टेर रहा तनतुष्टिनिरस्ता मुरली तेरा मुरलीधर।।211।। पलकें खुलीं रहीं दिन दिन भर पर तू जगा...
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हिमांशु । Himanshu
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[11 Dec 2009 21:53 PM]



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