काश, ठहरे पानी में हलचल हो
मेरे देश की संसद मौन है एम. अखलाक एक आदमी रोटी बेलता है, दूसरा सेंकता है, तीसरा न बेलता है न सेंकता है, सिर्फ खाता है। मैं पूछता हूं- तीसरा कौन है? मेरे देश की संसद मौन है। मैं इन चर्चित पंक्तियों से अपनी बात शुरू करता हूं। संभव है सतीश चंद्र श्रीवास...
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Kaushal
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[11 Dec 2009 15:11 PM]



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