जैसे कि किसी लम्बे वाक्य से गिर पड़ता है एक शब्द

कर्मनाशा कल दिलीप चित्रे नहीं रहे। साहित्य और सिनेमा तथा चित्रकला की दुनिया में उन्हें बहुत आदर के साथ याद किया जाता है। अब यह कहते हुए कितना अजीब-सा लग रहा है कि वे हमारे बीच नहीं हैं। हमारे साथ अगर कुछ है तो उनका विपुल सृजन और बेशुमार यादें। शायद ऐसे ही मौक... [पूरी पोस्ट]
writer sidheshwer
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[11 Dec 2009 12:23 PM]

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