अवधी उपन्यास - क़ासिद (8)

अवधी क्यार पहिला ब्लॉग जइसे टिल्लू क पहिलेहे ते पता होए कि अब का होए वाला है। टिल्लू अपन बस्ता दुआरे हे धरि दीन्हेनि हवेली केरे गेट क तीर और ह्वानै ठाढ़ हुइके गाना गावन लाग, “ ख्वाजा मेरे ख्वाजा..दिल में समा जा , ......अली का दुलारा.. , ख्वाजा मेरे ख्वाजा..। “ लरिकवा केरि... [पूरी पोस्ट]
writer पंकज शुक्ल
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[11 Dec 2009 11:59 AM]

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