अवधी उपन्यास - क़ासिद (8)
जइसे टिल्लू क पहिलेहे ते पता होए कि अब का होए वाला है। टिल्लू अपन बस्ता दुआरे हे धरि दीन्हेनि हवेली केरे गेट क तीर और ह्वानै ठाढ़ हुइके गाना गावन लाग, “ ख्वाजा मेरे ख्वाजा..दिल में समा जा , ......अली का दुलारा.. , ख्वाजा मेरे ख्वाजा..। “ लरिकवा केरि...
[पूरी पोस्ट]
पंकज शुक्ल
17
1
0
1
3
[11 Dec 2009 11:59 AM]



Shuffle








