एक व्यंग्य : अथ लोमड़ी कथा .....

हँसते रहो हँसाते रहो लोमडी ने ललचाई नज़रों से अंगूर देखा .मुंह में पानी भर आया और लार टपक गई .सोचने लग गई ....आहा! क्या रस भरे अंगूर होंगे...कितने मीठे होंगे...काश ! यह अंगूर अपने आप टपक जाता ...काश! यह अंगूर मैं तोड़ पाती...| यही सोच उसने दो-चार जोरदार छलाँग भी लगाईं .पर... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द पाठक
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[11 Dec 2009 09:51 AM]

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