भाग्य और पुरूषार्थ का महत्व-------(आधुनिक दृ्ष्टिकोण)
पिछले लेख में हम बात कर रहे थे कि जीवन में पुरूषार्थ और भाग्य दोनों का ही अलग अलग महत्व है । ये ठीक है कि पुरूषार्थ की भूमिका भाग्य से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है लेकिन सिर्फ इतना कह देने भर से भाग्य का महत्व किसी भी तरह से कम नहीं हो जाता । बहुत से ऎसे...
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पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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[11 Dec 2009 09:26 AM]



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