कुमार विश्वास की लुटायी मस्ती में झूमते रहे श्रोता...
स्वर्गीय कैलाश गौतम स्मृति समारोह ... कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !! मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है ! ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !! इन पंक्तियों से काव्यजगत और कविसम्मेलनी...
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विजेंद्र एस विज
समाचार
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[11 Dec 2009 09:12 AM]



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